Special Centre for Nanoscience

भौतिकी विज्ञान के विद्यालय, सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी, पर्यावरण विज्ञान का विद्यालय और जीवन विज्ञान के विद्यालयों में बहुत से समूह हैं जो सक्रीय रूप से अनुसंधान कार्य कर रहे हैं जो नैनोसाईंस एंड टेक्नोलॉजी के कई पह्लुयों को छूता है| हालांकि,तालमेल पूरी तरह से गायब है यद्यपि सहयोग व्यक्तिगत स्तर पर सीमित है| जेएनयू के पास अन्तःविषय अनुसंधान की संस्कृति का अपने लोकाचार में शामिल होने का फायदा है, यह स्वाभाविक है की नानोसाईंस एंड टेक्नोलॉजी जैसा विषय बहुत देर होने से पहले ही अकादमिक कार्यक्रम के बीच में आ जाता है| इसी भावना में, एक एडवाइजरी समिति जिसमे ६ वैज्ञानिक थे का २००६ में गठन (प्रो. एच.बी.बोहिदार की अध्यक्षता में) जेएनयू में ऐसी गतिविधियों के शुरू होने की सम्भावना को खोजने के लिए हुआ था| एडवाइजरी समिति रिपोर्ट महाविद्यालय को सौंपी गयी जिसमें जेएनयू में नैनोसाईंस केंद्र बनाने की स्पष्ट रूप से सिफारिश की गयी थी|

नैनो-साईंस का सार, मॉलिक्यूलर स्तर पर काम करने की क्षमता,मौलिक रूप से नए मॉलिक्यूलर ढाँचे के द्वारा एटम बाई एटम विशाल संरचना करना, है| उनके अद्वित्य गूणों को नियंत्रण संरचनायों और उपकरणों को एटॉमिक, मॉलिक्यूलर और सूपरामॉलिक्यूलर स्तर पर प्राप्त करके उसका लाभ उठाना और कुशलतापूर्वक निर्माण बनाने को सीखना और इन रचनायों को इस्तेमाल करने का उद्देश्य है| इसलिए, नैनो-सईन्सेज़ एंड टेक्नोलॉजी के साथ, हम यह ऑप्टिमाइज़ करने की कोशिश करते हैं की हम विज्ञान के बारे में क्या जानते हैं और समस्याओं को सुलझाने के लिए कैसे इस ज्ञान का इस्तेमाल करते हैं|

दि स्पेशल सेंटर फॉर नैनोसाईंस (एससीएनएस) की स्थापना जेएनयू में साल २०१० के दौरान यूजीसी के XIवीं पंचवर्षीय योजना के तहत पूर्ण समर्थित प्रोग्राम की तरह हुआ था| मानव संसाधन विकास की ओर ख़ास ध्यान देने की ज़रूरत है| नैनो-ईनिशियेटिव प्रोग्राम के कार्यान्वयन के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण में प्रशिक्षित नयी पीढ़ी के कर्मियों की ज़रूरत होगी| नैनो-स्केल के अवधारणाओं की पढ़ाई ज़रूर शुरू होनी चाहिए और शिक्षा व्यवस्था में कम से कम स्नातक स्तर से समझना जारी कर देना चाहिए| जो रोड-मैप परिकल्पित किया गया है उसमें इस क्षेत्र में अन्तःविषय शिक्षण और अनुसंधान प्रोग्राम को तुरंत प्रोत्साहित करके क्षमता निर्माण करना है|

 

प्रकाशन

मोमबत्ती कालिख, पी कुमार और एब बोहिदर, (2012) से गैर क्रियाशील कार्बन नैनोकणों के शारीरिक और प्रतिदीप्ति विशेषताओं।
विलायक polarity, प्रतिदीप्ति जीवनकाल और शराब समाधान, पी कुमार और एब बोहिदर, जे प्रतिदीप्ति, (2012), 22, 865-870 के स्थूल चिपचिपाहट के बीच यूनिवर्सल सहसंबंध।

पेटेंट

"संयुक्त राष्ट्र के क्रियाशील कार्बन नैनोकणों तत्संबंधी प्रतिदीप्ति लक्षण, तैयार करने की विधि है, और Bioimaging और विलायक सेंसिंग एजेंटों के रूप में उनके उपयोग"। भारतीय पेटेंट Appl। सं 2184 / डेल / 2010 और पीसीटी / इन-2,011-00,610 (एब बोहिदर और प्रदीप कुमार)

अध्ययन के कार्यक्रम

केंद्र अंत में नेनौसाइंस के क्षेत्र में विशेष विषय पाठ्यक्रम की पेशकश करेगा। एक पीएच.डी. कार्यक्रम भविष्य में परिकल्पित है

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