भारत में सार्वजनिक नीति और कानूनी सुधार का मेनिफोल्ड एजेंडा कई क्षेत्र में पर्याप्त शोध के अभाव में शक्तिहीन बना रहा जो भारतीय नागरिकों की रोज़मर्रा की जिंदगी पर प्रभाव डालता है|अपनी स्थापना के समय से, कानून और शासन के अध्ययन के केंद्र ने जांच करने का नया तरीका शुरू किया है कि कैसे कानून से शासन स्थिर होता है और कैसे यह अभ्यास कानून को आगे प्रतियोगिता के लिये खोलता है| केंद्र ने अनुसन्धान को तैयार करने और कानून और शासन के सम्बन्धों पर शिक्षण के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाया है| 

 

शासन का अध्ययन, इसके विभिन्न प्रकार में और अलग अलग साईट पर, समकालीन समस्याओं के लिए केन्द्रीय है: सार्वजनिक संस्थानों और सार्वजनिक कानून में सुधार, प्रक्रियाओं का निर्माण और स्थापना और नियम जो अधिक प्रभावकारी,पारदर्शी और जवाबदेही हो,और शासन को लोकतंत्र और नागरिक समाज को मज़बूत करके और समावेशी और भागीदारी बनाने की चुनौती| 

 

केंद्र का अन्तः विषय फोकस इस बात पर है कि, महत्वपूर्ण सार्वजनिक विज्ञान का दृष्टिकोण अपने प्रयासों से यह पता लगाता है कि कैसे कानून और शासन का अभ्यास राजनीति,आर्थिक,सामाजिक, और ऐतिहासिक प्रक्रियाओं में एम्बेडेड है, कैसे शासन का अभ्यास विभिन्न साईट जो सरकार,नौकरशाही,न्यायपालिका से लेकर परिवारों तक छितरी हुई है,सामजिक कानूनी प्रक्रियाएं जो न्याय से रोकती है या पहुँच प्रदान करती हैं,और राजनितिक-न्यायिक शासन में सरकारीता,सम्प्रभुता और अधिकारों के विचार| 

 

न्याय,न्यायपरस्ता,और स्वतंत्रता के प्रामाणिक आदर्श इस प्रकार से मौजूदा संस्थानों और कानून और शासन के अभ्यासों पर केंद्र के महत्वपूर्ण पूछताछ पर झुकाव डालता है| यह इसी स्वभाव से है कि, केंद्र के अकादमिक प्रोग्राम इन क्षेत्रों में विद्वानों के अनुसन्धान पैदा करता है, यह सिद्धांतों को भी शासन की प्रथा में बदलना चाहता है, और वाद-विवाद की शुरुआत,अनुसन्धान को साझा करना और अकादमी,सरकार,नागरिक समाज और अंतर्राष्ट्रीय एजेंसीज के वार्ता के लिए मंच प्रदान करना| 

 

एक दशक में जबसे यह अस्तित्व में आई है कानून और शासन के अध्ययन के केंद्र ने कम से कम 3 विशेषताओं को विकसित कर लिया है जो इसे बौधिक परिदृश्य का विशिष्ट हिस्सा बनाता है| पहला, केंद्र स्पष्ट रूप से अन्तः विषय है, जो अपने संकाय और उसके छात्र संगठन के साथ ही साथ शिक्षण और अनुसन्धान प्रोग्राम जिसको इसने बढ़ावा दिया है की विविध अकादमिक प्रशिक्षण से साबित होता है| दूसरा, केंद्र ने उस स्थान की तरह अपनी प्रतिष्ठा विकसित की है जहाँ अकादमिक कठोरता को नीती और वकालत पर प्रतिबिम्ब से जोड़ा जा सकता है| तीसरा, केंद्र, औपचारिक कानूनी ढाँचे और अभ्यास में शासन के बीच कड़ी को समझने के लिए, केंद्र-बिंदु बन गया है| 

 

पूरी तरह से जवाहरलाल नेहरु महाविद्यालय के साथ होने की वजह से, केंद्र विभिन्न प्रकार की पृष्ठभूमी- क्षेत्रीय,सामाजिक-आर्थिक और अकादमिक, के छात्रों को अपनी ओर खींचता है| इसके छात्र महाविद्यालय द्वारा आयोजित अखिल-भारतीय परीक्षा जो पूरे भारत में 71 केन्द्रों और नेपाल में 1 केंद्र पर होती है उसके द्वारा चुने जाते हैं| केंद्र बड़ी संख्या में विदेशी छात्रों को भी आकर्षित करता है, जिनमें से कुछ पाठ्यक्रम में भाग लेते हैं और बहुत से अनुसन्धान सम्बद्धता चाहते हैं| कुछ महाविद्यालय जिसके छात्र केंद्र और उसके विभाग से अनुसंधान करने के लिए सम्बद्ध हैं वो हैं-जोहन्स होपकिंस यूनिवर्सिटी,प्रिन्सटन यूनिवर्सिटी,स्तान्फोर्ड यूनिवर्सिटी,दि यूनिवर्सिटी ऑफ़ विस्कॉन्सिन मैडिसन में,दि यूनिवर्सिटी ऑफ़ जिनेवा,थे यूनिवर्सिटी ऑफ़ जुरिच,पेरिस-II,यूनिवेर्सिते पेरिस X नन्तेर्रे,ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंटरनेशनल एंड देवेलप्मेंट स्टडीज,जिनेवा,यूनिवेर्सिता दि रोमा ला सपिएन्ज़,रोम, और किंग’स कॉलेज,लन्दन|

 

केंद्र ने सफलतापूर्वक शैक्षणिक नवाचार का प्रयास किया है| वैकल्पिक पाठ्यक्रम की इसका शिक्षण मोटे तौर पर सेमिनार प्रारूप में होता है जहाँ छात्र कक्षा से पहले पढ़ते हैं,प्रस्तुति तैयार करते हैं और कक्षा में चर्चा में शामिल होते हैं| विभाग ऑडियो-विजुअल सामग्री का भी इस्तेमाल करता है जैसे की वृत्तचित्र और फीचर फिल्में| कुछ देशों में, ओपन-बुक परीक्षा भी आयोजित की जाती है|

 

कानून और शासन के अध्ययन का केंद्र उपयोगी और पारस्परिक रूप से समृद्ध अकादमिक सहकार्यता में प्रवेश कर गया है जिसके साथ विभिन्न संस्थान हैं| इनमें दि यूनिवर्सिटी ऑफ़ वार्विक,दि यूनिवर्सिटी ऑफ़ एसेक्स,दि यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिडनी और दि यूनिवर्सिटी ऑफ़ न्यू साउथ वेल्स शामिल है|