क्षेत्रीय विकास के अध्ययन के लिए केन्द्र की स्थापना 1971 में, एक जनादेश के साथ, भारत में क्षेत्रीय विकास की सम्पूर्ण सरंचना में रखे गए शिक्षण और शोध के लिए अध्ययन के बहुविषयक कार्यक्रम पर ध्यान केंद्रित करने के लिए किया गया था। इन वर्षों में विद्वानों का एक बहुविषयक दल इस सपने को साकार करने में लगा हुआ है। केंद्र तीन मुख्य क्षेत्रों: अर्थशास्त्र, भूगोल और जनसंख्या अध्ययन में एम ए (भूगोल) तथा एम फिल/पीएचडी कार्यक्रम प्रदान करता है। बहुविषयक स्वरुप तथा केंद्र के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, ये कार्यक्रम बहु-विभिन्न तथा बहुवादी, में क्षेत्रीय विकास के मुद्दों के साथ सामाजिक-आर्थिक, मानव, संस्थागत, प्रौद्योगिकीय, मूल सरंचनात्मक और पर्यावरणीय कारको से जुड़े होते हैं। ऐसा करने के लिए, वर्षों से शोध तथा केंद्र में शिक्षण ने उचित मानदंड तथा रिमोट सेंसिंग और जीआईएस सहित विश्लेषणों के उपकरण विकसित किये हैं।

केंद्र में एम. ए. भूगोल पाठ्यक्रम, पाठ्यक्रमों के एक विवेकपूर्ण मिश्रण के संदर्भ में, अद्वितीय है, जो विशेष रूप से भारतीय संदर्भ में उभरती अनुशासनात्मक चुनौतियों, के जवाब में, आधुनिक तथा सैद्धांतिक व्यवहार के साथ पारंपरिक का मेल करतें हैं। भूगोल में शास्त्रीय परंपराओं में, फील्ड कार्य का एक प्रमुख स्थान हैं। एम. ए. विद्यार्थी को दो अनिवार्य पाठ्यक्रम प्रदान किये जाते हैं, जी कि विशेष रूप से भौतिक और सामाजिक क्षेत्र सर्वेक्षण पर आधारित है। विशिष्ट तरीके में प्रशिक्षित होने तथा सबसे पहले फील्ड अवलोकन को प्राप्त करने के अलावा- अक्सर ग्रामीण परिवेश में- कठोर परिवेश में लम्बे समय से रहने वाले समूह, विद्यार्थियों को अंतर्वैयक्तिक कौशल तथा परस्पर अंतरनिर्भरता और टीम भावना को विकसित करने में मदद करते हैं।

विद्यार्थियों और संकाय की ताकत के मामले में, क्षेत्रीय विकास के अध्ययन के लिए केंद्र, विश्वविद्यालय में सामाजिक विज्ञान विद्यालय के केन्द्रों में एक सबसे बड़ा केंद्र है। केंद्र में वर्तमान में दो प्रोफेसर एमेरिटस, नौ प्रोफेसर, दस सहयोगी प्रोफेसर, और तीन सहायक प्रोफेसर हैं। केंद्र में शोध तथा स्नातकोत्तर विद्यार्थी, केंद्र के एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक हब को बनातें हैं। नियमित रूप से और उपचारात्मक शिक्षण कार्यक्रमों के समर्थन, साथ ही केंद्र की सह पाठयक्रम गतिविधियों के अलावा, शोध विद्यार्थियों ने देश तथा विदेश में बहुत संख्या में राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में पत्र प्रस्तुत करें हैं। वे अग्रणी शैक्षिक पत्रिकाओं में भी प्रकाशित किये गए हैं। केंद्र के विद्यार्थियों ने, केंद्र के विनिमय कार्यक्रमों के अंतर्गत, क्वींस विश्वविद्यालय, बेलफास्ट, ब्रिटेन, तथा कैसरस्लॉट्रन विश्वविद्यालय, जर्मनी का दौरा किया है। इन विदेशी विश्वविद्यालयों से विद्यार्थियों ने, बदले में, केंद्र का दौरा किया तथा इसके शिक्षण कार्यक्रमों और अन्य गतिविधियों से लाभ अर्जित किया।

क्षेत्रीय विकास के अध्ययन के केंद्र को अप्रैल 2003 में, यूजीसी द्वारा विशेष सहायक कार्यक्रम (एसएपी) के अंतर्गत ‘उन्नत अध्ययन केन्द्र' (सीएएस) का दर्जा प्राप्त हुआ। इसी के साथ, यह केंद्र, भारत में यह दर्जा प्राप्त करने वाला भूगोल में पहला विभाग बन गया। केंद्र के पहले चरण के सवाल्तापुर्वक पूरा होने के मद्देनज़र, सीएएस के रूप में सहायता का 2009 में अवधि की पाँच वर्षों (2009 – मार्च 2014) के लिए नए सिरे से नवीनीकरण किया गया। सीएएस ने ने हमें हमारे शिक्षण और शोध गतिविधियों को निरंतर रखने के लिए तथा साथ ही साथ ढांचागत सुविधाओं के निर्माण सहित नए शोध क्षेत्रों को बढ़ाने में सक्षम बनाया है। दुसरे चरण के लिए निर्धारित मुख्य क्षेत्र हैं: उन्नत रिमोट सेंसिंग और जीआईएस, जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, वैश्वीकरण/शहरीकरण/जनसंख्या, तथा क्षेत्रीय असमानतायें तथा सामाजिक बहिष्कार।

केंद्र की शिक्षण और शोध गतिविधियाँ पेशेवर तथा तकनीकी स्टाफ द्वारा संचालित/समर्थित हैं तथा इस उद्देश्य के लिए केंद्र आवश्यक बुनियादी सुविधाओं से सुसज्जित है। केंद्र में एक दस्तावेज़ केंद्र तथा छह प्रयोगशालाएँ हैं। केंद्र विद्यालय की कंप्यूटर इकाई का रख-रखाव करता है तथा केंद्र में कंप्यूटर सहायता युक्त जीआईएस तथा कार्टोग्राफी के लिए प्रयोगशाला है।