क्षेत्र मैं-अनुसंधान

गणितीय प्रतिरूपण विभिन्न प्रणालियों के पर्यावरण से पारास्पारिक रूप से प्रभावित होने की बेहतर समझ के लिए एक तेज़ एवं प्रभावी माध्यम है।  अतः ध्यान मुख्य रूप से प्रतिरूपण की ओर ही आकर्षित होता है।  (ए) पारिस्थितिकी तन्त्र (बी) अरैखिक जैविक एवं भौतिक प्रणालियाँ तथा (सी) खगोलभौतिक प्लाज्मा के सैद्धांतिक दृष्टिकोण। वातावरण संचार तथा प्रदूषक तत्वों के प्रसार का एक माध्यम है,  तथा एक बार जब प्रदूषक तत्व हवा में छोड़ दिए जाते हैं, वे वातावरण की परिस्थितियों के नियंत्रण में होते हैं।प्रदूषक तत्वों की जांच करना काफी महँगा तथा समय लेने वाला है, परन्तु प्रतिरूपण काफी किफायती एवं तेज़ है . अतः  वायु की गुणवत्ता निर्धारण के प्रतिरूपण जो विभिन्न क्षेत्रों एवं वातावरणों में पॉइंट, नॉन पॉइंट तथा एक से अधिक स्त्रोतों पर काम करते हैं, का विकास किया जा रहा है . .इनका हर प्रकार के उद्योगों के लिए वातावरण प्रभाव आंकलन अध्ययन में भी काफी उपयोग होता है . उष्णकटिबंधीय चक्रवात कई भौतिक तत्वों जैसे प्रदूषक तत्वों को ज़मीनी सतह से ऊपरी क्षोभमंडल तथा और आगे ले जाते हैं .ये प्रदूषक तत्व हटाने वाले का कार्य भी कर सकते हैं .इन प्रक्रियाओं की बेहतर समझ के लिए उश्न्कतिबंधीय चक्रवातों का गणितीय प्रतिरूपण प्रगति पर है . ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों में जनसंख्या के आ जाने से हवा की गुणवत्ता दूषित होती है, आवाज़ का स्तर बढ़ता है एवं शहरी वातावरण प्रभावित होता है . शहरीकरण के प्रभाव का आंकलन करने के लिए हवा की गुणवत्ता का आकाशीय बदलाव, जो कि एसओ२, नोक्स, टीएसपी, ओ३ जैसे सर्वव्यापी प्रदूषक तत्वों से जुड़ा हुआ है तथा वायुमंडलीय मानदंड एवं आवाज़ का स्तर भी आंकलित किया जा रहा है . विभिन्न चरणों के प्रभाव को देखने के लिए प्रयोग किये जा रहे हैं, खासकर आवाज़ कम करने, हवा की गुणवत्ता में वृद्धि करने एवं शहरी वातावरण को स्वच्छ बनाने के लिए वनस्पतिकरण. इसके अलावा आवाज़ का त्वरित रूप से पता लगाने एवं नियामक एजेंसियों की मदद के लिए औद्योगिक स्त्रोतों एवं शहरी क्षेत्रों के लिए गणितीय प्रतिरूपण किया जा रहा है . एयरोसोल अपने आकार के वितरण के अनुसार वातावरण को प्रभावित करते हैं . प्रतिरूपण ऊर्जा खपत एवं वातावरण पर एयरोसोल के प्रभाव का अध्ययन कार्य भी प्रगति पर है . आधुनिकीकरण की वजह से आज के दौर में हम काफी मात्रा में विद्युत् उपकरणों का प्रयोग करने लगे हैं, जिसके फलस्वरूप हमारे आसपास विद्युत् क्षेत्र पैदा हो गए हैं . एक सुरक्षित कसौटी पर खरे उतरने के लिए एन्थ्रोपोजेनिक इलेक्ट्रोपोल्यूशन के जैविक प्रभावों पर सामान्य तौर पर उभरने वाली आवृत्ति के स्तर की तरह के प्रयोग किये जा रहे हैं . अल्ट्रासाउंड की मदद से जैविक टिश्यू चरित्र चित्रण का कार्य भी प्रगति पर है 

क्षेत्र I फैकल्टी

प्रोफेसर वी के जैन

प्रोफेसर कृशन कुमार

प्रोफेसर ए पी डिमरी

डॉक्टर अरुण कुमार श्रीवास्तव