scmmमॉलिक्यूलर मेडिसिन के धार वाले क्षेत्रों में एकीकृत एम.एससी –पीएचडी प्रोग्राम २०१५-२०१६

दि यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन ने अपने IX योजना सिफारिशों में जवाहरलाल नेहरु महाविद्यालय के संरक्षण में स्पेशल सेंटर फॉर मॉलिक्यूलर मेडिसिन(एससीएमएम) को स्थापित करने का फैसला लिया है| एससीएमएम का उद्देश्य मॉलिक्यूलर और कोशिका जीवविज्ञान के साथ मानव रोग के अध्ययन में प्रत्यक्ष आवेदन के क्षेत्र में अनुसन्धान को प्रोत्साहित करना है| एससीएमएम का प्रारूप एक नयी अवधारणा था जो भारत में पहले प्रयास नही किया गया|

मॉलिक्यूलर और कोशिका जीवविज्ञान में हाल की प्रगति में मेडिकल अनुसन्धान और अभ्यास के लिए विशाल क्षमता है| अब तक, उन्हें बीमारी का कारण और उन्हें कैसे रोका जाये, यह निर्धारित करने के लिए सबसे ज्यादा सफलतापूर्वक शोषित किया गया है| हालांकि, यह स्पष्ट है की रेकोम्बिनैंट डीएनए टेक्नोलॉजी और आधुनिक कोशिका जीवविज्ञान लगभग मेडिकल अभ्यास के हर शाखा में अपना अनुप्रयोग ढूंढ लेंगें| यह कैंसर अनुसन्धान को क्रांतिकारी बना रहा है, बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री का विस्तार किया है जो पहले से ही विस्तृत प्रकार के नैदानिक और चिकितस्य एजेंट तैयार कर रहा है और, लम्बी अवधि में,आधुनिक मेडिसिन के कुछ अनसुलझे रहस्य: कार्डियोवैस्कुलर बीमारीयाँ, नयूरोनल बीमारियाँ, संक्रामक बीमारियाँ और भी बहुत सी के कारणों को स्पष्ट करने में मुख्या भूमिका निभाने का वादा करता है| इसे जीव विज्ञानं जिसमें विकास,उम्र बढ़ने और क्रागत उन्नति के व्यापक पहलुओं में जानकारी हासिल करने में हमारी मदद करनी चाहिए|

जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी कोर विज्ञान में प्रमुख शोध और अभ्यास केंद्र के रूप में उभरा है, जो पिछले कुछ दशकों में जीवविज्ञान और सम्बन्धित क्षेत्रों के अधीन था| मॉलिक्यूलर कोशिका जीवविज्ञान के साथ अन्तःविषय क्षेत्र जैसे कि बायोइन्फरमेटिक्स और कंप्यूटर विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान और भौतिकी विज्ञान में अनुसन्धान और शिक्षण प्रोग्राम में कई अनुसंधान समुहों ने महत्वपूर्ण रूप से योगदान दिया है| आधुनिक विज्ञान को इन सभी क्षेत्रों के अन्तः विषय आवेदनों से बहुत फायदा हुआ है और बहुत सी हालिया प्रगति को सीधे तरह से पारम्परिक गैर-चिकित्सीय क्षेत्रों में मिले इनपुट को ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है| इसलिए जवाहरलाल यूनिवर्सिटी ने व्यापक दृष्टिकोण को डिजाईन और क्रियान्वित करने के लिए नेतृत्व की भूमिका उठायी है जो मॉलिक्यूलर मेडिसिन में नए अनुसंधान प्रोग्राम और शिक्षण को लक्ष्य बनाएगा|

बिओमेदिकल विज्ञान में मॉलिक्यूलर मेडिसिन एक उभरता हुआ क्षेत्र है जिसका लक्ष्य स्वास्थ्य और रोगों के मॉलिक्यूलर निर्धारकों को समझने के साथ रोगों के रोकथाम,निदान और उपचार के ज्ञान को लागू करने को एकमात्र उद्देश्य बनाना है| जेएनयू में दि स्पेशल सेंटर फॉर मॉलिक्यूलर मेडिसिन(एससीएमएम) ने भारत में इस क्षेत्र में अनुसन्धान और शिक्षा का बीड़ा उठाया और पहला राष्ट्रीय केंद्र है जो पीएच.डी स्तर की ट्रेनिंग दे रहा है| केंद्र अपने लक्ष्यों को अभिनव और सहयोगात्मक बुनियादी और नैदानिक शोध कार्यक्रम के माध्यम से पूरा करना चाहता है| अपने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए, केंद्र ने पहले ही कई सहयोगी अनुसंधान कार्यक्रमों को सम्मानित राष्ट्रीय और अन्तराष्ट्रीय मेडिकल अनुसंधान संस्थानों के साथ शुरू कर दिया है|

एससीएमएम का लक्ष्य मानव रोगों में मॉलिक्यूलर और कोशिका जीवविज्ञान के आधुनिक औजारों के इस्तेमाल के अध्ययन में शिक्षण और अनुसन्धान गतिविधियों को बढ़ावा देने का है| एससीएमएम ने युवा वैज्ञानिकों(नैदानिक और गैर-नैदानिक) के प्रशिक्षण के लिए अकादमिक कार्यक्रम को शुरू किया है, जो बुनियादी मेडिकल अनुसन्धान में अपना करियर बनाना चाहते हैं| प्रशिक्षण कार्यक्रम को मुख्यतः २ तरह के वैज्ञानिकों को विकसित करने के लिए डिजाईन किया गया है, जो मेडिकल विज्ञान के जारी प्रगति में योगदान कर सकते हैं| सबसे पहले बुनियादी क्लिनिकल डिग्री वाला चिकित्सक है पर वह मेडिसिन में लागू आधुनिक जीवविज्ञान के सार से परिचित है और उसे समझता है| दूसरा आधुनिक जीववैज्ञानिक है, पर जिसके पास मेडिसिन में पर्याप्त ज्ञान है जो चिकित्सीय समस्यों को उर्वारक रूप से समझौता कर सकता है जिससे वे समाज को उत्पाद और प्रक्रियाओं को देने में सक्षम हो सकें| इन लक्ष्यों को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए, एससीएमएम ने अध्ययन के निम्न कार्यक्रम की शुरुआत कर दी है|

बुनियादी विज्ञान में मेडिकल स्नातक और विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए, केंद्र ने मॉलिक्यूलर मेडिसिन में प्री-पीएचडी और प्रत्यक्ष पीएचडी प्रोग्राम की शुरुआत की है और निम्नलिखित थ्रस्ट वाले क्षेत्रों में शिक्षण और अनुसंधान कार्यक्रमों को लक्ष्य रखा है:

  1. मेटाबोलिक विकार: डायबिटीज टाइप २, कार्डियोवैस्कुलर बीमारियाँ, स्वास्थय और रोगों में स्टेरॉयड/नुक्लेअर रिसेप्टर्स, कोशिका-कोशिका जंक्शन से सम्बन्धित बीमारियाँ, न्यूरोडीजेनेरेटिव विकार|
  2. संक्रामक और गैर-संक्रामक बीमारियाँ: प्लासमोडियम फाल्सीपेरम का जीवविज्ञान और कोशिका चक्र विनियमन, हेपेटाईटिस सी, लिश्मेनियासिस, हेलिकोबक्टर रोगजनन और डीएनए रेप्लीकेशन, कैंडीडीयासिस,बैक्टीरिया बिओफिल्म्स, इन्नेट इम्यून की शिथिलताओं का जीवविज्ञान, कोशिका-कोशिका जंक्शन में रोगजनकों द्वारा उतार- चढ़ाव|