भारत में भाषा विज्ञान का केंद्र भाषा विज्ञान और भाषा अध्ययन का बढ़ते हुए केंद्रों में से है। केंद्र कोर क्षेत्र जैसे ध्वन्यात्मक, फोनोलॉजी, आकारिकी और वाक्यविन्यास साथ ही अंतः विषय भाषा अध्ययन जैसे कि न्यूरो संज्ञात्मक भाषाई और समाज शास्त्रीय पर फोकस करता है। केंद्र पिछले कई सालों से क्षेत्र के तरीकों , सेमियोटिक्स और भारतीय भाषा विज्ञान परंपरा में विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है। संकाय द्वारा अनुसंधान के दूसरे क्षेत्रों में भाषा टाईपोग्राफी और सांकेतिक भाषा, साथ में जैव भाषाई जो कुछ आम दिलचस्पियों में उभरता हुआ क्षेत्र है, शामिल है। केंद्र द्वारा किये गए अनुसंधान के परिणाम स्वरुप इंडो- आर्यन, द्रविड़ियन,ऑस्त्रो-एशियाटिक समेत मुंडा,तिब्बतो-बर्मन और अंडमानी जैसी कम जानी हुई भाषाओँ में वर्णनात्मक व्याकरण हुआ है। भाषाओं के उन पन्नों को देखें जिसपर शिक्षकों और विद्यार्थियों ने अनुसंधान किये हैं। केंद्र के पास आदिवासी और हाशिये की भाषाओँ, व्यवहारिक रूप से भारत की सभी भाषा परिवार पर क्षेत्र आधारित निगम है।

केंद्र अपने वर्तमान रूप में 2005 में बना था, पर यह 1974 से भाषा विज्ञान के समूह के रूप में रहा जो अंग्रेजी के समूह के साथ मिल गया और 1978 में सेंटर ऑफ़ लिंग्विस्टिक्स एंड इंग्लिश की स्थापना हुई। केंद्र में 20 एम. ए., 14 एम. फिल, और 3 सीधे पीएच.डी विद्यार्थियों को हर साल भर्ती करने की क्षमता है। एम. ए प्रोग्राम विद्यार्थियों को सैद्धांतिक और चालू भाषा विज्ञान में मूलभूत पाठ्यक्रम के साथ साथ विद्यार्थियों को व्याकरण,शब्दकोश और समुदाय की वाणी का सोसिओलिंगुइस्टिक प्रोफाइल के प्रशिक्षण के आधार पर होता है। भाषा विज्ञान का यह केंद्र देश में इकलौता केंद्र है जो एम. ए के स्तर पर दूरस्थ क्षेत्रों में अनुसंधान को आसान बनाता है।

एम. फिल/पीएच. डी प्रोग्राम एक अमीर और पुरस्कृत अनुसंधान है जो किसी भी विषय के स्नातकोत्तर विद्यार्थी के लिए खुला है। स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के अलावा, केंद्र हर सेमेस्टर भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक अध्ययन के विद्यालय के स्नातक छात्रों को भाषा विज्ञान 2-3 वैकल्पिक और टूल पाठ्यक्रम उपलब्ध करवाता है।

भारत में भारतीय और विदेशी छात्रों की चयन प्रक्रिया पूरी तरह से जेएनयू की तरह है, जिसमें भारत के 65 केंद्रों और पड़ोसी देश जिसमे बांग्लादेश,नेपाल और श्रीलंका है, वहाँ प्रवेश परीक्षा आयोजित होती है। विदेशों के विदेशी छात्रों के आवेदन केंद्र द्वारा समन्वयक के कार्यालय में योग्यता के आधार पर देखा जाता है। केंद्र दूसरे विद्यालयों के केंद्रों के साथ डिजिटल भाषा की प्रयोगशाला की सुविधा के सांझा करता है। इसके पास प्रयोगात्मक ध्वन्यात्मक अध्ययन और न्यूरो संज्ञात्मक अध्ययन के लिए सॉफ्टवेर भी है, और मानसून सेमेस्टर 2007 से अच्छी तरह से सुसज्जित कंप्यूटर कक्षा होगी।