पर्यावरण विज्ञान के विद्यालय की स्थापना सन् १९७४ में हुईI विद्यालय के अकादमिक कार्यक्रमों की नियमित रुप से समीक्षा की गई, संशोधित और अपडेट किया गया, तेज़ फ़ोकस की ज़रूरत को दिमाग में रखते हुए, किसी भी समय उपलब्ध विशेषज्ञ, और व्यक्तिगत कोर्स या विशिष्ट कार्यक्रम के पाठ्यक्रम मे बदलाव की इच्छाI विद्यालय ने अपना पहला एम.एससी प्रोग्राम १९७६ में शुरू किया था। यह कुछ प्रमुख संशोधन करने के लिए कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया था । यह दोबारा १९८७ में शुरू हुआ था, जिसके बाद यह सफलतापूर्वक चल रहा है । हालांकि, अनुशासन के गतिशील प्रकृति के अतिरिक्त इसके कई उप विषयों में जबर्दस्त वृद्धि को ध्यान में रखते हुए, प्रोग्राम को फिर से २००९ में संशोधित किया गया और यह शैक्षणिक २०१०-२०११ से उपलब्ध हुआ। (पाठ्यक्रम एम.एससी)

एम.फिल/पीएच.डी प्रोग्राम जो १९७५ में शुरू हुआ था उसके पाठ्क्रम में भी नियमित बदलाव हुए हैं। यह देश में पर्यावरण विज्ञान में एम.फिल/पीएच.डी शुरू करने वाला पहला स्कूल है। (पाठ्यक्रम एम.फिल) स्कूल ने अपनी दिलचस्पी विभिन्न मिट्टी, वायुमंडलीय और जैविक प्रक्रियाओं में विविध कर ली है। पारिस्थितिक और सामाजिक प्रक्रियाओं में सम्बन्ध स्कूल की दिलचस्पी को अतिरिक्त आयाम देता है, जो काम को प्रासंगिक बनाता है। इसलिए, पाठ्यक्रम में अनुशासनात्मक क्षेत्रों के घटकों जैसे शारीरिक विज्ञान, धरती और वायुमंडलीय विज्ञान, पर्यावरण जीव विज्ञान, और पर्यावरण की निगरानी और प्रबंधन शामिल है। ऐसे ऊंचे स्तर की विविध अनुसन्धान में दिलचस्पी से, १०० से ज्यादा विद्यार्थियों ने पर्यावरण विज्ञान के विभिन्न पहलुयों में अपने पी.एचडी प्रोग्राम को सफलता पूर्वक पूरा किया है।

 

१.९.९७ के स्कूल की तालिका के अनुसार ११९- एम.फिल\पी.एचडी ९१ और एम.एससी में २८ विद्यार्थी थे। रिपोर्ट के तहत उस वर्ष में कुल २८ विद्यार्थियों को डिग्री से सम्मानित किया गया था, एम.एससी १३, एम.फिल ८ और पी.एचडी ७ है।