पूर्व कुलपति

प्रो.एस.के.सोपोरी
8 जनवरी 2011 - 27 जनवरी 2016
 

प्रो. सुधीर कुमार सोपोरी एक प्रख्यात वैज्ञानिक और शिक्षाविद् थे। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के जीवन विज्ञान संस्थान (एसएलएस)में संकाय सदस्य के रूप में वर्ष 1973 में अपने अकादमिक कैरियर की शुरुआत की थी। प्रो. सोपोरी वैज्ञानिक शोध और शिक्षण में अपने अग्रणी योगदान के लिए विभिंन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किए गए हैं।उनमें सेनिम्न लिखित पुरस्कार उल्लेखनीय हैं: सीएसआईआर का प्रतिष्ठित भटनागर पुरस्कार, चक्रवर्ती पुरस्कार, बोटनीकल सोसायटी का बीरबल साहनी पदक, भारतीय विज्ञान कांग्रेस का बीरबल साहनी जन्मशती पुरस्कार, बेलारूस एकेडमी ऑफ साइंसेज कागोडनेव अवार्ड लेक्चर और भारत सरकार का पद्मश्री। वह भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (नई दिल्ली), भारतीय विज्ञान अकादमी (बेंगलूरु), राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (इलाहाबाद), राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी (नई दिल्ली) और वर्ल्ड एकेडमी ऑफ साइंसेज (ट्राइस्टे, इटली) के निर्वाचित अध्येता (फेलो) हैं। उन्हें अमेरिकन सोसायटी फॉर प्लांट बायोलॉजी, 2010 का कॉरेसपोंडिंग मेम्बरशिप अवार्ड भी मिला है।इस पुरस्कार को प्राप्त करने वाले वह पहले भारतीय हैं। वह विश्वविद्यालय के ग्यारहवें कुलपति थे।

 

प्रो.बी.बी. भट्टाचार्य
29 जून 2005 – 27 जनवरी 2011
 

प्रख्यात अर्थशास्त्री और शिक्षाविद् प्रो.बारीद बरन भट्टाचार्य आर्थिक मॉडलिंग और पूर्वानुमान के अग्रणी विशेषज्ञ थे। उन्होंने कई विशिष्ट पदों जैसे इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ, दिल्ली के बतौर निदेशक आदि संभाले। उन्होंने भारत सरकार के कई महत्वपूर्ण आयोगों और समितियों और शिक्षण संस्थानों में बतौर अध्यक्ष/सदस्य कार्य किया है। वह पेरिस में नवाचार राजनीति के लिए फाउंडेशन के पर्यवेक्षी बोर्ड के सदस्य थे। उन्हें कई पुरस्कार और सम्मान मिले जैसे फ्रांस सरकार काऑर्डर डे पाम्ज एकेडमिक्स, बैंक ऑफ बड़ौदा का सन लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड, कालीदास सम्मान, यूरोपीय बिजनेस कॉंसिल का सुकरात पुरस्कारऔर मदर टेरेसा लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड आदि। वह विश्वविद्यालय के दसवें कुलपति थे।

 

प्रो.जी.के. चड्ढा
1 मई 2002 – 6 जून 2005
 

प्रख्यात शिक्षाविद और अर्थशास्त्रीप्रो. गोपाल कृष्ण चड्ढा प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य थे। वह भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली;भारतीय योजना आयोगऔर अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन, नई दिल्ली स्थित क्षेत्रीय कार्यालय के सलाहकार पैनल पर भी थे। इसके अलावावह अर्थशास्त्र में सभी शैक्षिक एसोसिएशनों के आजीवन सदस्य रह चुके हैं। वहसाउथ एशियन यूनिवर्सिटी के पहले अध्यक्ष रह चुके हैं। वह इस विश्वविद्यालय के नौवें कुलपति थे।

 

प्रो. आशीष दत्ता
29 जून 1996 – 30 अप्रैल 2002
 

प्रख्यात आणविक जीव विज्ञानी और शिक्षाविद् प्रो. आशीष दत्ता को 1999 में  "पद्म श्री " पुरस्कार और 2006 में "पद्म भूषण" पुरस्कार प्राप्त हुआ । वह शान्ति स्वरुप भटनागर पुरस्कार और "प्रियदर्शिनी पुरस्कार" प्राप्त कर चुके हैं। प्रो. दत्ता सभी तीन प्रमुख भारतीय विज्ञान अकादमियों तथा "तीसरी दुनिया की विज्ञान अकादमियां" के निर्वाचित अध्येता (फेलो)  हैं। वह अनेक अन्य पुरस्कार और सम्मान विजेता रहे हैं।  प्रो. दत्ता ने विभिंन पदों पर सरकार की सेवा की है। वह राष्ट्रीय पादप जीनोम अनुसंधान संस्थान (एनआइपीजीआर) के संस्थापक निदेशक थे। वह जेएनयू के आठवें कुलपति थे।

 

प्रो. योगिंदर कुमारअलग
14 दिसंबर 1992-28 जून 1996
 

प्रख्यात अर्थशास्त्री, शिक्षाविद् और सरकार के नीति सलाहकार प्रो. योगिंदर कुमारअलगने बतौर राज्य सभा सदस्य सेवा की है तथा वह योजना एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा विद्युत राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नियुक्त हुए। वह विभिन्न संस्थाओं के प्रमुख और आयोगों के अध्यक्ष रहे तथा उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के कई संगठनों मेंबतौर विशेषज्ञ काम किया। वह योजना आयोग, भारत सरकार के सदस्य भी थे। वह गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलाधिपति हैं। वह जेएनयू के सातवें कुलपति थे।

प्रो.मोहम्मद शाफी अगवानी
7अक्तूबर 1987-6अक्तूबर 1992
 

पश्चिम एशिया विषय के शिक्षाविद् और विशेषज्ञ प्रो. मोहम्मद शाफी अगवानी का इस विश्वविद्यालय के साथ काफी लंबे समय तक जुड़ाव रहा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अध्ययन संस्थान (एसआईएस) में पश्चिम एशियाई अध्ययन केन्द्र को स्थापित करने में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने ऐसा माहौल बनाने के लिए प्रयास किया जिसमें शिक्षक और छात्र अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दे सकें। वह कुलपति रहने के बाद राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य थे। वह जेएनयू के छठे कुलपति थे । 

प्रो.पी.एन. श्रीवास्तव
5 मार्च 1983- 30 अप्रैल 1987
 

प्रख्यात वैज्ञानिक (जीवन विज्ञान) तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (1986) के प्रमुख वास्तुकार और स्वायत्त कॉलेजों की अवधारणा के मुख्य समर्थकप्रो पी.एन. श्रीवास्तव विश्वविद्यालय के पांचवें कुलपति थे। उनके कार्यकाल के दौरान विश्वविद्यालय की प्रवेश नीतियों में बदलाव देखने को मिले तथा केंद्रीकृत प्रवेश-परीक्षा की शुरुआत हुई। बाद में वह योजना आयोग, भारत सरकार के सदस्य बने। उन्होंने भारतीय विज्ञान कांग्रेस संघ के बतौर अध्यक्ष भी कार्य किया।

येलवर्ती नायडुम्मा
12 जून 1981-27 अक्तूबर 1982
 

प्रतिष्ठित वैज्ञानिक प्रो.येलवर्ती नायडुम्मा केंद्रीय चर्म अनुसंधान संस्थान (सीएलआरआई), मद्रास के प्रमुख रह चुके हैं तथा वह वर्ष 1981 में इस विश्वविद्यालय के कुलपति के पदकी जिम्मेदारी लेने से पहले सीएसआईआर, नई दिल्ली के महानिदेशक थे। उन्हें वर्ष 1971 में पद्मश्री सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारोंतथा सम्मानों से नवाजा गया। वह जेएनयू के चौथे कुलपति थे।

के.आर. नारायणन
3 जनवरी 1979-14 अक्तूबर 1980
 

प्रो. केचरिल रमण नारायणन भारत गणराज्य के राष्ट्रपति बने। वह एक कैरियर राजनयिक थे जो थाइलैंड, तुर्की और चीन जैसे विभिन्न देशों में राजदूत के रूप में देश की सेवा की है।उन्होंने एक शिक्षाविद के रूप में अपने कैरियर की शुरुआत की और बाद में एक पत्रकार (संक्षेप) बने। जेएनयू छोडने के बाद उन्हें अमेरिका का राजदूत नियुक्त किया गया। वे तीन बार लोकसभा के लिए चुने गए और उन्होंने 1985-89 तक केंद्रीय मंत्री के रूप में कार्य किया। वह 1992 में भारत के उप राष्ट्रपति चुने गए तथा 1997 में गणतंत्र के सर्वोच्च पद तक पंहुचे। वह जेएनयू के तीसरे कुलपति थे।

प्रो. बसंती दुलाल नागचौधरी
1 जुलाई 1974 – 1 जनवरी 1979
 

प्रख्यात शिक्षाविद और भौतिकशास्त्री (नाभिकीय भौतिकी), प्रो. बसंती दुलाल नागचौधरीने योजना आयोग के सदस्य और रक्षा मंत्रालय,रक्षा अनुसंधान तथा विकास महानिदेशक, भारत सरकार के वैज्ञानिक सलाहकार के रूप में भी इस देश की सेवा की। प्रो.नागचौधरी 1964 में भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के फैलो चुने गएऔर उन्हें 1975 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। वह जेएनयू के दूसरे कुलपति थे।

जी. पार्थासारथी
28 अप्रैल 1969 – 27 अप्रैल 1974
 

पत्रकार, प्रसिद्ध क्रिकेटरऔर ख्यातिप्राप्त राजनयिक जिन्होंने तीन दशकों से अधिक समय तक महत्वपूर्ण सलाहकार पदों पर कार्य किया है।नेहरू से लेकर राजीव गाँधी तक समय में गोपालस्वामी पार्थासारथी वर्ष 1969 में इस विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति बने और उन्होंने अंतर्विषयी अध्ययन और शोध के इस प्रमुख विश्वविद्यालय के उभरने में मदद करके एक शिक्षाविद्के रूप में अमिट छाप छोड़ी। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) की स्थापना की और आइसीएसएसआर के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया है।