परिकल्पना

परिकल्पना

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए बिल, तत्कालीन शिक्षा मंत्री, श्री एम सी चागला द्वारा राज्यसभा में  सितम्बर, 1965 पर रखा गया था। की गयी चर्चा के दौरान, , माननीय पार्लियामेंट सदस्य श्री भूषण गुप्ता राय ने आवाज उठाई कि यह एक और विश्वविद्यालय नहीं होना चाहिए।  वैज्ञानिक समाजवाद सहित नए संकायों को बनाया जाना चाहिए तथा एक बात ओर जो कि इस विश्वविद्यालय को सुनिश्चित करनी चाहिए किमहान विचारों को ध्यान में रखा जाना चाहिए  और समाज के कमजोर वर्गों से छात्र/छात्राओं के लिए पहुँच प्रदान की जानी चाहिए।  जेएनयू बिल 16 नवम्बर 1966 पर लोकसभा में पारित किया गया था तथा 22 अप्रैल, 1969 को जेएनयू अधिनियम अस्तित्व में आया।

विश्वविद्यालय 1976 से, नई दिल्ली में अरावली  सीमा पर लगभग 1000 एकड़ जमीन में फैले हुए एक परिसर में स्थित है, जो अब एक हरे-भरे खुले क्षेत्र में बदल चुका हैं हांलांकि, पिछले चालीस वर्षों के दौरान कई शैक्षिक भवन, छात्रावास, तथा संकाय तथा स्टाफ के लिए आवासीय परिसर आ गयें हैं। वर्तमान में विश्विद्यलय में 7300 छात्र/छात्राएँ हैं, जो देश तथा विदेश के सभी भागों तथा समाज के सभी वर्गों से आये हैं। प्रशासनिक स्टाफ के अतिरिक्त यहाँ लगभग 500 संकाय सदस्य हैं, जो छात्र/छात्राओं सहित, परिसर में रहतें हैं तथा जो सामाजिक तथा व्यावसायिक स्थिति पर विचार किये बिना एक दुसरे के साथ बातचीत तथा आपस में मिलते-जुलते हैं। 

परिसर का रहने वाला माहौल तथा सामाजिक परिवेश भी शिक्षण और शोध में एक एकीकृत, बहुविषयक दृष्टिकोण में परिलक्षित होता है। यहाँ पाठ्यक्रम की सामग्री को परिभाषित करने तथा तैयार करने या नए पाठ्क्रम शुरू करने की स्वतंत्रता है। शोध के विषय, क्षेत्र में नए विकास तथा अध्ययन के विभिन्न क्षेत्रों के बीच इंटरफेस के साथ विकसित होतें हैं। विश्वविद्यालय में हर कोई, अपने शोध के क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए, स्वयं के साथ प्रतिस्पर्धा रखता/रखती है। जेएनयू शैक्षणिक दृष्टि से और सामाजिक रूप से एक जीवंत जगह है जहाँ, सभी के पास अपने विचार व्यक्त करने के लिए स्थान है।

विश्वविद्यालय के दस विद्यालय और चार विशेष केन्द्र, उच्च गुणवत्ता शोध प्रकाशन, किताबें, वर्किंग पेपर तथा एम। फिल और पीएचडी शोध का उत्पादन करतें हैं। जेएनयू के पूर्व छात्र/छात्राओं ने शिक्षा, सरकारी, निजी सेक्टरों में तथा वास्तव में जीवन के सभी पहलुओं पर महत्वपूर्ण पदों पर स्थान अर्जित किया हुआ है। हाल ही में जेएनयू को एनएएसी द्वारा देश में शीर्ष विश्वविद्यालय के रूप में के स्थान दिया गया है।

जेएनयू उच्च शिक्षा के क्षेत्र में, नए विचारों के बीज बोने तथा ज्ञान को बढ़ावा देने के द्वारा तथा मूल्यों तथा सामाजिक प्रतिबद्धता के साथ, उच्च स्तर के प्रशिक्षण को प्रदान करने के द्वारा, एक प्रमुख भूमिका निभाता रहेगा।